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मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने तय किया है कि प्रस्ताव की हर पहलू से जांच की जाए। अधिकार प्राप्त समिति रियायत समझौते की शर्तों, केरल के हितों और कानूनी प्रावधानों का अध्ययन करेगी। समिति अपनी सिफारिश सरकार को देगी और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार ऐसा कोई फैसला नहीं करेगी, जिससे केरल के हितों को नुकसान पहुंचे।

सरकार ने स्पष्ट किया कि विझिंजम बंदरगाह का मालिकाना हक केरल सरकार के पास है। निजी कंपनी को केवल बंदरगाह के विकास, संचालन और प्रबंधन का अधिकार मिला है। मुख्यमंत्री के अनुसार, रियायत समझौते की धारा 5.3 के तहत कंपनी की 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी का हस्तांतरण राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विधानसभा में दिए गए उनके बयान का आधार यही था कि उस समय तक सरकार को कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला था। अब आवेदन मिलने के बाद प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया कि सरकार ने हिस्सेदारी हस्तांतरण को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि मीडिया में यह खबरें चलीं कि शेयर ट्रांसफर हो चुका है, जबकि वास्तविकता यह है कि अभी ऐसा कोई हस्तांतरण नहीं हुआ है। उनका कहना था कि किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की पूरी जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने सरकार की नाराजगी के बाद ही औपचारिक मंजूरी के लिए आवेदन किया।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अदाणी पोर्ट्स और एमएससी के बीच बातचीत करीब एक वर्ष से चल रही थी। उनका दावा है कि पिछली सरकार को भी इस प्रक्रिया की जानकारी थी। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा एमएससी के आने से बंदरगाह पर एकाधिकार बनने का आरोप सही नहीं है। मुख्यमंत्री के अनुसार, रियायत समझौते की धारा 5.8.1 साफ कहती है कि बंदरगाह सभी उपयोगकर्ताओं के लिए खुला रहेगा और यदि किसी तरह का एकाधिकार बनने की स्थिति आती है तो सरकार हस्तक्षेप कर सकती है। इसलिए किसी एक कंपनी के पूरे संचालन पर नियंत्रण की आशंका सही नहीं है।

Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/vizhinjam-port-stake-transfer-row-why-has-kerala-government-put-the-deal-on-hold-panel-to-review-proposal-2026-07-08