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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 17 जुलाई को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत है। उन्होंने दूरदर्शन को दिए एक विशेष साक्षात्कार में यह बात कही। मल्होत्रा ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और संभावित कमजोर मानसून को भारत के लिए प्रमुख जोखिम बताया। उन्होंने अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपए के प्रदर्शन का भी बचाव किया।

उन्होंने मौद्रिक नीति पर बोलते हुए कहा कि आरबीआई उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति के मुख्य आंकड़ो से परे जाकर नीतिगत निर्णय लेने से पहले इसकी संरचना पर बारीकी से नजर रखता है। जिसमें मूल मुद्रास्फीति और मूल्य दबावों से उत्पन्न होने वाले कारक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा हमार लक्ष्य सीपीआई मुद्रास्फीति है, लेकिन हम इसकी संरचना, मूल मुद्रास्फीति और कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारणों पर बारीकी की जांच करते हैं और नजर बनाए रखते हैं।

गवर्नर ने ऋण वृद्धि पर बोलते हुए कहा, सभी क्षेत्रों में ऋण वृद्धि व्यापक स्तर पर बनी रही है। जून में कुल बैंक ऋण सालाना आधार पर लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं क्षेत्रिय आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि क्षेत्र में ऋण वृद्धि लगभग 15 प्रतिशत, उद्योग में 17 प्रतिशत, सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में 24 से 25 प्रतिशत, अवसंरचना क्षेत्र में 11 से 12 प्रतिशत और आवास क्षेत्र में 11 प्रतिशत रही। गोल्ड लोन के बारे में बोलते हुए कहा कि इसमें तेजी से विस्तार देखा जा रहा है, लेकिन आरबीआई को किसी विशेष क्षेत्र में तत्काल कोई चिंता दिखाई नहीं दे रही है। हम सभी क्षेत्रों, बैकों और विनियमित संस्थाओं पर लगातार नजर बनाए रखते हैं। इसलिए हमने फिलहाल किसी क्षेत्र में किसी भी तरह का कोई जोखिम नहीं दिखाई दे रहा है। गवर्नर ने कहा वित्तीय क्षेत्र पूरी तरह से स्थिर बने हुए हैं। भारतीय बैंक पर्याप्त पूंजी है। जिसमें पूंजी पर्याप्तता 17 प्रतिशत से अधिक है और तरलता कवरेज का अनुपात लगभग 120 प्रतिशत है।

गवर्नर मल्होत्रा ने रुपये की गिरावट पर कहा, कि भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलल के हाल की मजबूती की बाद भी भारतीय मुद्रा वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि हाल में सरकार द्वारा उठाय एक कदमों से जिसमें सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर कर छूट, लंबी अवधिक के सॉवरेन बॉन्ड के लिए फुल एक्सेसिबल रूट का विस्तार और सेवा निर्यात सहित प्रेषण प्रवाह में लगातार मजबूती शामिल है। यह भारत के बाहरी क्षेत्र को समर्थन देंगे।

उन्होंने ने बताया कि पिछले साल लभग 95 अरब डॉलर के रिकॉर्ड सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) रहा और चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों के दौरान शुद्ध एफीडीआई प्रवाह लगभग 7 अरब डॉलर रहा है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों से निर्यात को बढ़ावा मिलने और समय के साथ चालू खाता मजबूत होने की संभाचना है।

उन्होंने डिजिटल धोखाधड़ी को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बारे में कहा कि आरबीआई लगातार इस पर नजर बनाए हुए है और सक्रिय और पूर्व निवारक हस्तक्षेप पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हुए अपने पर्यवेक्षी ढांचे को मजबूत किया है। उन्होंने जनवरी 2027 से लागू होने वाले सीमित देखता ढांचे के बारे में बताते हुए कहा, कि इस के तहत ग्राहकों को कम मूल्य की डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी ने निर्देशित मामलों में 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिलेगा।

Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/indian-economy-strong-amid-west-asia-tensions-monsoon-a-major-risk-rbi-governor-2026-07-17