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मूडीज रेटिंग्स ने 22 जून 2026, सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत की जल प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। मूडीज के अनुसार, देश की खंडित जल शासन संरचना वित्तीय और ऋण जोखिम बढ़ा रही है। अत्यधिक सब्सिडी वाला मूल्य निर्धारण और क्षेत्रों के बीच धीमा जल पुनर्वितरण भी प्रमुख कारण हैं।
भारत में जल शासन 28 से अधिक राज्यों में फैला हुआ है। जल प्रबंधन और नीतियां मुख्य रूप से व्यक्तिगत राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित होती हैं। कृषि क्षेत्र देश के ताजे पानी का लगभग 80 फीसदी उपभोग करता है। इसके लिए मूल्य निर्धारण अत्यधिक सब्सिडी वाला है। विभिन्न क्षेत्रों के बीच जल का पुनर्वितरण भी धीमा है। कई क्षेत्रों में आवश्यक अवसंरचना में निवेश के लिए संसाधनों की कमी है। यह स्थिति जल प्रबंधन को और जटिल बनाती है।
मूडीज के अनुसार, ऐसे ढांचे लंबे समय तक पानी की कमी का कारण बन सकते हैं। इनसे उच्च लागत और औद्योगिक व सार्वजनिक सेवा में बड़े व्यवधान उत्पन्न होते हैं। इसका परिणाम निरंतर वित्तीय दबाव के उच्च जोखिम के रूप में सामने आता है। इससे समायोजन में देरी होती है और लगातार ऋण तनाव बना रहता है। यह देश की आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है।
विश्व संसाधन संस्थान की रिपोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए मूडीज ने बताया है। भारत में गर्मी के तनाव, बाढ़ और मानसून की परिवर्तनशीलता के प्रति उच्च ऋण जोखिम है। जल प्रबंधन श्रेणी में बहुत उच्च ऋण जोखिम है। यह पुरानी जल अवसंरचना और अत्यधिक भूजल दोहन के कारण है। इन कारकों से देश की जल सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/india-s-fragmented-water-management-poses-fiscal-credit-risks-moody-s-2026-06-22