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राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की कोच्चि पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। पीठ ने केरल के एक ऑटो डीलर के खिलाफ दिवाला याचिका खारिज कर दी। न्यायाधिकरण ने कहा कि दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) का उपयोग निजी कर्ज वसूली के लिए नहीं किया जा सकता है।
न्यायाधिकरण ने पाया कि कर्ज वितरित करने से पहले ही काफी ब्याज काट लिया गया था। कर्जदारों ने मूलधन का भुगतान साप्ताहिक किस्तों में किया था। इस कर्ज संरचना के आधार पर प्रभावी वार्षिक ब्याज दर करीब 84.41 फीसदी हो सकती थी। न्यायाधिकरण ने इस उधार मॉडल को अद्वितीय प्रथा बताया। पीठ ने कहा कि ऐसी प्रणाली को दिवाला प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पीठ ने यह भी देखा कि याचिकाकर्ताओं ने अन्य कंपनियों के खिलाफ भी इसी तरह के दिवाला मामले दायर किए थे। इन मामलों में भी समान वचन पत्र लेनदेन और एक ही अंतरिम समाधान पेशेवर का प्रस्ताव था। न्यायाधिकरण ने कहा कि एनसीएस ऑटोकार्स के व्यावसायिक रूप से दिवालिया होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। याचिकाकर्ताओं का पूरा जोर वचन पत्रों के तहत दावा की गई राशि और उस पर ब्याज की वसूली पर था। न्यायाधिकरण ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह आईबीसी के उद्देश्यों को पूरा नहीं करेगा।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/nclt-rejects-insolvency-plea-against-auto-dealer-citing-debt-recovery-misuse-2026-07-06