शेयर बाजार में बढ़ते उतार-चढ़ाव के बीच मल्टी-फैक्टर फंड निवेशकों के लिए नया विकल्प बनकर उभरे हैं। जानिए ये फंड कैसे काम करते हैं, किन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं और इनमें निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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प्रयागराज में रहने वाले अमित कुमार पिछले कुछ दिनों से सुबह की चाय चैन से नहीं पी पा रहे हैं। वजह है शेयर बाजार का मौजूदा मिजाज। कुछ दिन पहले तक जब छोटे और मझोले शेयर रॉकेट की तरह भाग रहे थे। पिछले हफ्ते जैसे ही बड़ी कंपनियों ने कमान संभाली और छोटे शेयरों में मुनाफावसूली हुई, अमित के पोर्टफोलियो का रंग हरे से लाल हो गया।

यह फंड बाजार के दो या दो से अधिक प्रमाणित स्तंभों को एक साथ चुनता है। इसके मुख्य चार स्तंभ हैं- गुणवत्ता (कम कर्ज और अधिक मुनाफा), वास्तविक मूल्य (सस्ते दामों पर मिलने वाले अच्छे शेयर), रफ्तार (तेजी से ऊपर की ओर भागते शेयर) और कम उतार-चढ़ाव (स्थिर शेयर जो बाजार के झटकों में ज्यादा नहीं डगमगाते)।

एक कंप्यूटर आधारित प्रणाली पूरे शेयर बाजार को खंगालती है। यह समाचारों की सुर्खियों को नजरअंदाज कर केवल उन्हीं शेयरों को चुनती है, जो एक साथ कई कसौटियों पर खरे उतरते हैं।

पोर्टफोलियो को हमेशा धारदार बनाए रखने के लिए, यह फंड हर तीन या छह महीने में खुद-ब-खुद बदलाव करता है।

इस उतार-चढ़ाव में आपके लिए कौन-सा मिश्रण सही है? आक्रामक निवेशक: रफ्तार+गुणवत्ता यदि आप बाजार के मौजूदा हिचकोलों से नहीं डरते और लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो यह मिश्रण आपके लिए है। रफ्तार आपको तेजी का पूरा फायदा दिलाएगी, जबकि गुणवत्ता यह पक्का करेगी कि आपका पैसा केवल मजबूत बुनियादी ढांचे वाली कंपनियों में ही लगे। संतुलित निवेशक: गुणवत्ता+वास्तविक मूल्य यह उन आम निवेशकों के लिए है, जो आज की उथल-पुथल के बीच रात को चैन की नींद सोना चाहते हैं। इसमें आपको साफ-सुथरी कंपनियां भी मिलती हैं और वे सही तथा किफायती दामों पर भी हासिल होती हैं। रूढ़िवादी निवेशक: कम उतार-चढ़ाव+गुणवत्ता अगर आपका मुख्य उद्देश्य अपनी पूंजी को बाजार के दौरों से बचाना है, तो यह मिश्रण आज के बाजार में एक शॉक-एब्जॉर्बर की तरह काम करता है। आपका पैसा लगातार लाभांश देने वाली बेहद स्थिर कंपनियों में सुरक्षित रहता है। इन बातों का रखें ध्यान कंपनियां अक्सर इन फंडों को पुराने आंकड़ों की शानदार रिपोर्ट दिखाकर बेचती हैं। बाजार के बड़े बदलावों के दौरान ऐसा भी हो सकता है कि दो अलग-अलग स्तंभ कुछ समय के लिए एक साथ सुस्त पड़ जाएं। हर 3-6 महीने में पोर्टफोलियो की कड़ाई से छंटनी होती है। इससे प्रबंधन का खर्च बढ़ सकता है। फैक्टर रणनीतियों में 30% तक का आवंटन करें। अस्वीकरण: मल्टी-फैक्टर फंड्स, सेबी द्वारा परिभाषित म्यूचुअल फंड की एक स्वतंत्र श्रेणी नहीं हैं। यह मूल रूप से एक निवेश रणनीति है। निवेशकों को निवेश निर्णय से पहले संबंधित योजना दस्तावेजों और जोखिम कारकों को अच्छे से समझना चाहिए।

Source: https://www.amarujala.com/business/bonus/multi-factor-funds-a-smart-shield-against-market-volatility-for-investors-2026-06-15