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मूडीज रेटिंग्स ने गुरुवार को बताया कि भारत का निजी ऋण बाजार पिछले पांच वर्षों में दोगुना हो गया है। 2025 के अंत तक इसका प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) करीब 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। मजबूत वित्तपोषण मांग के कारण यह बाजार आगे भी बढ़ेगा। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए नियम बैंकों को अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण की अनुमति देंगे।

भारत का निजी ऋण बाजार पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ा है। 2025 में इसका वार्षिक लेनदेन मूल्य 11 अरब डॉलर से अधिक था। उसी वर्ष के अंत तक इसका एयूएम लगभग 25 अरब डॉलर था। वैश्विक मानकों के अनुसार यह बाजार अभी भी छोटा है। देश में मजबूत आर्थिक स्थितियों के बीच वित्तपोषण की जरूरतें बढ़ने से इसकी वृद्धि तेज होगी। भारत के निजी ऋण बाजार में बढ़ने की काफी गुंजाइश है। यह बढ़ती वित्तपोषण जरूरतों और देश की मजबूत व्यापक आर्थिक गति से समर्थित है।

आरबीआई के नए नियम बैंकों को अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण की अनुमति देते हैं। इससे निजी ऋण बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। पहले यह क्षेत्र वैकल्पिक पूंजी पर निर्भर था। उधारकर्ताओं को कम लागत पर अधिक वित्तपोषण मिल सकता है। हालांकि, निजी ऋण प्रदाताओं के लिए प्रतिफल कम हो सकता है। अधिग्रहण वित्तपोषण के सौदों में भी कमी आ सकती है। यह बदलाव बाजार की गतिशीलता को प्रभावित करेगा।

रियल एस्टेट क्षेत्र निजी ऋण के कुल मूल्य का लगभग 40 फीसदी हिस्सा रखता है। बुनियादी ढांचा और उपयोगिता कंपनियां अगले सबसे बड़े हिस्सेदार हैं। विभिन्न क्षेत्रों में प्रवर्तकों के नेतृत्व वाला वित्तपोषण भी भारत में निजी ऋण बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह वित्तपोषण अक्सर पुनर्वित्त, देयता प्रबंधन या हिस्सेदारी अधिग्रहण जैसे उद्देश्यों के लिए होता है। इन क्षेत्रों में मजबूत मांग से बाजार को और बढ़ावा मिल रहा है।

Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/india-s-private-credit-market-soars-to-usd-25-billion-rbi-rules-bring-new-competition-2026-07-02