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देश के कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल सुस्त पड़ने से खरीफ फसलों की बुवाई में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर मानसून और अल-नीनो के बढ़ते खतरे ने न सिर्फ किसानों बल्कि नीति निर्माताओं की भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका सीधा असर आने वाले दिनों में खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है।

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 25 जून तक देश भर में खरीफ फसलों का कुल रकबा 182.72 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि (236.46 लाख हेक्टेयर) के मुकाबले पूरे 23 प्रतिशत कम है। मुख्य खरीफ फसल यानी धान का रकबा 25.17 प्रतिशत घटकर 34.41 लाख हेक्टेयर से 25.75 लाख हेक्टेयर पर आ गया है।

खरीफ फसलों की बुवाई सीधे तौर पर जून में शुरू होने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर करती है। लेकिन, भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, 24 जून तक मानसूनी बारिश सामान्य से 42 प्रतिशत कम रही है।

बारिश न होने के कारण सिंचाई के लिए पानी का संकट भी गहराता जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा मॉनिटर किए जाने वाले 166 महत्वपूर्ण जलाशयों में 25 जून तक कुल जल स्तर 48.405 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) था, जो इनकी कुल क्षमता (एफआरएल) का सिर्फ 26.37 प्रतिशत है। यह जल भंडार पिछले साल के मुकाबले केवल 73.21 प्रतिशत ही है। चिंता की बात यह है कि 166 में से 55 जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य के 80 प्रतिशत या उससे नीचे चला गया है। इनमें से 29 जलाशय तो ऐसे हैं जहां जल स्तर सामान्य के 50 प्रतिशत या उससे भी नीचे आ गया है।

Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/monsoon-deficit-hits-agriculture-kharif-sowing-slumps-23-el-nino-threatens-crop-yields-2026-06-30