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इस साल सोयाबीन की खेती 6 फीसदी तक कम रहने की आशंका है। 15 दिनों में बारिश में सुधार नहीं हुआ, तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी 5 से 7 फीसदी घट सकता है।
वैश्विक बाजारों में पाम तेल की उपलब्धता में कमी और घरेलू बाजार में सरसों व सोयाबीन के पर्याप्त स्टॉक के चलते भारत ने आयात कम किया है, जिससे आने वाले समय में घरेलू स्टॉक पर दबाव बढ़ेगा।
एफएमसीजी कंपनियों और स्टॉकिस्टों की मांग थोड़ी सुस्त जरूर है। लेकिन, अगस्त के पहले पखवाड़े से बाजार में रिकवरी आएगी और दिवाली तक त्योहारी मांग चरम पर होगी। यह मांग कीमतों को और ऊपर धकेलेगी।
वैश्विक स्तर पर बायोफ्यूल में पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ने से सोया तेल और सूरजमुखी तेल महंगा हुआ है। रुपये की कमजोरी ने रिफाइनर्स के लिए आयात लागत बढ़ा दिया है।
Source: https://www.amarujala.com/business/bonus/inflation-wheat-prices-rise-food-oil-costs-may-increase-before-festive-season-2026-07-17