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भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत बुनियाद पर खड़ी है, लेकिन आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण है। वित्त मंत्रालय की ताजा मंथली इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025-26 के शानदार प्रदर्शन के बाद चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती महीनों में भी आर्थिक गतिविधियों ने अपनी मजबूती बनाए रखी है। हालांकि, आसमान मानसूनी बारिश, उभरते अल-नीनो के खतरे और वैश्विक अनिश्चितताओं ने अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर कुछ चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ चुनिंदा हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स घरेलू आर्थिक गतिविधियों की ताकत को दिखाते हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में हल्की सुस्ती भी देखी गई है:

मजबूत संकेत: ई-वे बिल जेनरेशन, पीएमआई इंडेक्स, बिजली की खपत और ऑटोमोबाइल की बिक्री में लगातार तेजी बनी हुई है।

सुस्ती के संकेत: वहीं, कोर इंडस्ट्रीज, ईंधन की खपत, हवाई यात्री यातायात, उपभोक्ता विश्वास और श्रम बाजार से जुड़े कुछ संकेतकों में थोड़ी नरमी आई है।

इसके बावजूद, नीतिगत सुधारों और निवेश की गति के कारण औद्योगिक गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं, और संशोधित आईआईपी व डब्ल्यूपीआई फ्रेमवर्क से औद्योगिक और मूल्य गतिशीलता को अधिक कुशलता से मापे जाने की उम्मीद है।

भारत के लिए महंगाई के मोर्चे पर अच्छी खबर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट, तथा यूरिया जैसे प्रमुख इनपुट की कीमतों में नरमी से आयातित महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा:

बफर स्टॉक और सप्लाई: सरकार के पास प्रमुख कृषि उत्पादों का पर्याप्त बफर स्टॉक है और निरंतर सप्लाई-साइड प्रबंधन से संभावित बाधाओं को दूर करने में मदद मिल रही है।

विदेशी निवेश: निर्यात का शानदार प्रदर्शन, लचीला एफडीआई प्रवाह और आरामदायक विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी मोर्चे को मजबूत कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया विवाद: पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में सुधार हुआ है, जिससे बाहरी और महंगाई के दबाव से बड़ी राहत मिली है।

लंबे समय तक चले पश्चिम एशिया के संकट ने भारत के लचीलेपन की परीक्षा ली और यह याद दिलाया कि देश को महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए बफर स्टॉक पर एक राष्ट्रीय नीति बनाने की तत्काल आवश्यकता है। अब सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है:

कमजोर मानसून और अल-नीनो: आसमान बारिश और अल-नीनो की स्थिति से कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा के पैटर्न में अप्रत्याशितता बढ़ रही है, ऐसे में जल संरक्षण और 'जल जीवन मिशन' के बजटीय आवंटन का सही उपयोग अब नीति निर्माताओं की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

कृषि नीतियों में बदलाव: वित्त मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत की कृषि मूल्य नीतियों में बदलाव की सख्त जरूरत है, ताकि जलवायु-अनुकूल फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जा सके और अधिक पानी सोखने वाली फसलों को हतोत्साहित किया जाए।

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट यह आश्वस्त करती है कि वैश्विक झटकों के बावजूद भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता बरकरार है। विदेशी ऋण निवेशक भारतीय बाजार में लौट आए हैं और वैश्विक 'एआई-बबल' की चिंताओं के बीच जल्द ही इक्विटी प्रवाह के भी सकारात्मक होने की उम्मीद है। हालांकि, दुनिया भर में जलवायु और भू-राजनीति से जुड़ी अस्थिर घटनाओं को देखते हुए, नीति निर्माताओं को संभावित चुनौतियों से एक कदम आगे रहने के लिए लगातार सतर्क रहना होगा।

Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/finance-ministry-report-indian-economy-resilient-but-monsoon-deficit-and-geopolitical-risks-loom-large-2026-06-30