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भारत में गोल्ड लोन सिर्फ अचानक आई पैसों की जरूरत पूरी करने का साधन नहीं रह गया है। पिछले एक साल में सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के बाद लोगों ने अपने पास रखे सोने के बदले पहले से कहीं ज्यादा लोन लेना शुरू कर दिया है। हालांकि, हाल के महीनों में सोने की कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन गोल्ड लोन की मांग अब भी मजबूत बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब लोग गोल्ड लोन को केवल इमरजेंसी के विकल्प के रूप में नहीं देखते। पहले इसे मजबूरी में लिया जाने वाला लोन माना जाता था, लेकिन अब इसे एक सामान्य वित्तीय साधन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत से बढ़कर 52 प्रतिशत हो गई है। यानी अब अच्छी आर्थिक स्थिति वाले लोग भी गोल्ड लोन लेने लगे हैं।
अब गोल्ड लोन का इस्तेमाल सिर्फ घरेलू जरूरतों के लिए नहीं हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक लोग इसका उपयोग इन कामों के लिए भी कर रहे हैं,
वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक, कई पुराने ग्राहकों ने सोने की बढ़ी कीमतों का फायदा उठाकर पहले से बड़ा लोन लिया और अपने पुराने लोन की अवधि भी बढ़ाई।
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 तक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) द्वारा सोने के बदले दिए गए लोन में सालाना आधार पर लगभग 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यह सबसे तेजी से बढ़ने वाला लोन वर्ग रहा।
मई 2026 तक एनबीएफसी का गोल्ड लोन लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
मई 2024 में कुल लोन में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी करीब तीन प्रतिशत थी, जो अब लगभग छह प्रतिशत हो गई है।
बैंकों का गोल्ड लोन 105 प्रतिशत बढ़कर 5.1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
मई 2024 में बैंकों के कुल लोन में इसकी हिस्सेदारी 0.64 प्रतिशत थी, जो मई 2026 तक बढ़कर 2.4 प्रतिशत हो गई।
मार्च 2023 में बैंकों और एनबीएफसी का कुल गोल्ड लोन 6.3 लाख करोड़ रुपये था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 19.4 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह बताता है कि इस क्षेत्र में लगातार तेज वृद्धि बनी हुई है। एनबीएफसी के कुल कर्ज में खुदरा कर्ज की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत रही, जिसमें गोल्ड लोन का हिस्सा 5.6 प्रतिशत था। उद्योग क्षेत्र को दिए गए कर्ज की हिस्सेदारी 37.4 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत रही। आईसीआरए का अनुमान है कि देश का संगठित गोल्ड लोन बाजार मार्च 2027 तक बढ़कर करीब 15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
एक्सपेरियन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में गोल्ड लोन की सबसे तेज वृद्धि इन राज्यों में दर्ज की गई
हालांकि, दक्षिण भारत अब भी गोल्ड लोन का सबसे बड़ा बाजार है, लेकिन इसकी पहुंच अब पूरे देश में तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, कर्ज की मुख्य वजह हो सकती है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल दोनों कीमती धातुओं में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना करीब 1.33 लाख रुपये था, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.79 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद कीमतों में गिरावट आई और अब तक सोना 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच चुका है।
विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, भारत के आधिकारिक स्वर्ण भंडार 880.3 टन है। इस आधार पर भारत दुनिया में आठवें स्थान पर है। हालांकि यह अमेरिका के 8,133.5 टन स्वर्ण भंडार का लगभग दसवां हिस्सा है। भारत की सबसे बड़ी ताकत सरकार के पास रखा सोना नहीं, बल्कि घरों और मंदिरों में रखा सोना है। अलग-अलग संस्थानों का अनुमान है कि भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास मौजूद सोने का भंडार दुनिया के किसी भी देश के आधिकारिक स्वर्ण भंडार से कहीं अधिक है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, जनवरी 2026 तक भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की कीमत पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह भारत की जीडीपी के लगभग 125 प्रतिशत के बराबर है। परिवारों की गैर-रियल एस्टेट संपत्ति में सोने की हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है। वहीं, इसकी कीमत लोगों की बैंक जमा और शेयर बाजार में किए गए निवेश के कुल मूल्य से भी लगभग 175 प्रतिशत अधिक है। एसोचैम की रिपोर्ट गोल्ड्स न्यू होराइजन के मुताबिक, भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास मिलाकर करीब 50 हजार टन सोना है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख करोड़ रुपये है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सोने का बड़ा हिस्सा अभी भी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से बाहर है। विश्व स्वर्ण परिषद का अनुमान है कि भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास करीब 25 हजार टन सोना है। इसकी अनुमानित कीमत 2.4 लाख करोड़ रुपये है, जो वर्ष 2026 में भारत की अनुमानित जीडीपी के लगभग 56 प्रतिशत के बराबर है। आईआईएफएल के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास मौजूद 25 हजार टन सोने की कीमत देश की जीडीपी के लगभग 80 प्रतिशत के बराबर है। संस्था का कहना है कि यह सोना अर्थव्यवस्था को सहारा देता है और कठिन समय में सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की कुल कीमत करीब 3.8 लाख करोड़ रुपये है। यह भारत की जीडीपी के लगभग 89 प्रतिशत के बराबर है। यूबीएस के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास करीब 28 हजार टन सोना है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये है। यह दुनिया में मौजूद कुल सोने का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा है।
पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट के अनुसार, 2007-2012: गोल्ड लोन बाजार में तेज बढ़ोतरी
सोने की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई।
गोल्ड लोन देने वाली एनबीएफसी कंपनियों ने तेजी से अपनी शाखाएं बढ़ाईं।
सोने की बढ़ी कीमतों के कारण लोगों को अपने गहनों पर पहले से ज्यादा लोन मिलने लगा।
2012-2015: बाजार की रफ्तार धीमी पड़ी
गोल्ड लोन बाजार की वृद्धि धीमी हो गई।
आरबीआई ने गोल्ड लोन पर मिलने वाले कुछ नियामकीय लाभ वापस ले लिए, जिससे कंपनियों के लिए फंड जुटाना महंगा हो गया।
सोने की कीमतों में गिरावट आने से लोन-टू-वैल्यू अनुपात प्रभावित हुआ।
कई मामलों में लोन की राशि गिरवी रखे गए सोने की कीमत से ज्यादा हो गई, जिससे खराब ऋण (NPA) बढ़ने लगे।
आरबीआई ने अधिकतम एलटीवी सीमा 85% से घटाकर 75% कर दी।
गोल्ड लोन बाजार में धीरे-धीरे सुधार शुरू हुआ।
कंपनियों की कामकाज की क्षमता बेहतर हुई।
ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलने लगीं।
नोटबंदी का असर गोल्ड लोन की मांग पर भी पड़ा।
इस दौरान कई एनबीएफसी कंपनियां नकदी की कमी से जूझीं, जिससे नए लोन देने की उनकी क्षमता प्रभावित हुई।
2018-2022: महामारी के बीच गोल्ड लोन की मांग बढ़ी
कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों को नकदी की जरूरत बढ़ी, जिससे गोल्ड लोन की मांग बढ़ी।
एनबीएफसी कंपनियों ने अपने कामकाज को और बेहतर बनाया तथा लागत कम की।
डिजिटल गोल्ड लोन, टॉप-अप लोन और घर बैठे गोल्ड लोन जैसी नई सेवाएं शुरू की गईं।
बड़ी कंपनियों के कुल प्रबंधनाधीन ऋण (AUM) में करीब 20% की बढ़ोतरी हुई।
कंपनियों ने बेहतर वसूली व्यवस्था और सख्त नीलामी प्रक्रिया के जरिए खराब ऋण को नियंत्रित किया।
गोल्ड लोन कारोबार में डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ।
फिनटेक कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ी।
पहले दक्षिण भारत तक सीमित कई एनबीएफसी कंपनियों ने देश के दूसरे राज्यों में भी अपना कारोबार बढ़ाया।
2024 से आगे: कीमतों और तकनीक का असर
सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई।
नियामकीय निगरानी बढ़ी और लोन-टू-वैल्यू सीमा के पालन पर अधिक जोर दिया गया।
कंपनियों ने कामकाज को और अधिक कुशल बनाने पर ध्यान दिया।
जोखिम का आकलन और प्रबंधन बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने लगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के नए गोल्ड लोन नियम 1 अप्रैल से लागू हो चुके हैं। इनका उद्देश्य गोल्ड लोन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, उधारकर्ताओं के हितों की रक्षा करना और सभी बैंकों व वित्तीय संस्थानों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना है। 1. छोटे गोल्ड लोन पर अधिक लोन मिलेगा अब लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात लोन की राशि के आधार पर तय होगा।
2.5 लाख रुपये तक के गोल्ड लोन पर सोने की कीमत का अधिकतम 85% तक लोन मिलेगा।
2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक के लोन पर अधिकतम 80% तक लोन मिलेगा।
5 लाख रुपये से अधिक के लोन पर अधिकतम 75% तक लोन मिलेगा।
2. बुलेट रिपेमेंट वाले लोन पर सख्ती अब बुलेट रिपेमेंट वाले गोल्ड लोन में
मूलधन और ब्याज दोनों का पूरा भुगतान 12 महीने के भीतर करना होगा।
केवल ब्याज जमा कर बार-बार लोन की अवधि बढ़ाने (रोलओवर) की अनुमति नहीं होगी।
3. लोन चुकाने के बाद सोना जल्दी लौटाना होगा लोन पूरी तरह चुकाने के बाद बैंक या वित्तीय संस्था को गिरवी रखा गया सोना उसी दिन या अधिकतम 7 कार्य दिवस के भीतर लौटाना होगा। तय समय में सोना वापस नहीं करने पर संस्था को प्रति दिन 5,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। 4. लोन एग्रीमेंट में पूरी जानकारी देना जरूरी अब हर गोल्ड लोन एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से यह जानकारी देना अनिवार्य है।
लोन चुकाने के बाद सोना लौटाने की समय-सीमा
5. सोने का मूल्यांकन कैसे होगा? लोन की राशि तय करने के लिए पिछले 30 दिनों की औसत कीमत और पिछले कारोबारी दिन की कीमत में जो कम होगी, उसी को आधार बनाया जाएगा। यह कीमत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन या सेबी से मान्यता प्राप्त एक्सचेंज की दरों के अनुसार होगी। मूल्यांकन में केवल सोने की कीमत शामिल होगी। हीरे, रत्न, पत्थर या मेकिंग चार्ज को इसमें नहीं जोड़ा जाएगा। 6. डिफॉल्ट होने पर नीलामी के नए नियम अगर उधारकर्ता लोन नहीं चुकाता है, तो
नीलामी से पहले उसे सूचना देना अनिवार्य होगा।
नीलामी का शुरुआती आरक्षित मूल्य बाजार मूल्य का 90% होगा।
अगर लगातार दो नीलामी सफल नहीं होती हैं, तो आरक्षित मूल्य 85% तक किया जा सकेगा।
नीलामी से अतिरिक्त राशि मिलने पर उसे सात दिनों के भीतर उधारकर्ता को लौटाना होगा।
7. स्थानीय भाषा में जानकारी देना अनिवार्य बैंक या वित्तीय संस्था को लोन की सभी शर्तें और सोने के मूल्यांकन की जानकारी उधारकर्ता की पसंदीदा भाषा में उपलब्ध करानी होगी। अगर उधारकर्ता पढ़-लिख नहीं सकता, तो सभी शर्तें एक स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में उसे समझानी होंगी। आरबीआई ने क्या चिंता जताई है? आरबीआई ने कहा है कि गोल्ड लोन की तेज बढ़ोतरी पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, अगर सोने की कीमतों में लंबे समय तक बड़ी गिरावट आती है तो,
गिरवी रखे सोने का सुरक्षा मूल्य घट सकता है।
कर्ज लेने वालों पर दबाव बढ़ सकता है।
लोन नहीं चुकाने के मामले बढ़ सकते हैं।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/why-is-demand-for-gold-loans-surging-in-india-why-are-people-pledging-their-gold-2026-07-09