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सरकार ने शुक्रवार को देश के ई20 इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पर सोशल मीडिया में फैल रही गलत सूचनाओं का खंडन किया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 सूत्री स्पष्टीकरण जारी किया। मंत्रालय ने पानी के अत्यधिक इस्तेमाल, इंजन को नुकसान, बीमा अमान्य होने और पर्यावरणीय नुकसान जैसे दावों को खारिज किया है। यह कार्यक्रम पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने जुड़ा है। मंत्रालय ने बताया कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययनों, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नियामकीय सुरक्षा उपायों पर आधारित है।
मंत्रालय ने एक लीटर इथेनॉल उत्पादन में 10,000 लीटर पानी की खपत के दावे को भी गलत बताया। मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल डिस्टिलरी प्रति लीटर इथेनॉल के लिए लगभग तीन से पांच लीटर पानी का उपयोग करती हैं। ये डिस्टिलरी पानी को फिर से इस्तेमाल करने से जुड़ी प्रणाली का तेजी से संचालन कर रही हैं।
सरकार ने ई20 को अप्रमाणित ईंधन बताने के दावे को खारिज किया। उसने बताया कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दशकों से हो रहा है। अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपीय देशों ने इसे अपनाया है।
ई20 के कारण इंजनों को नुकसान पहुंचने या पुर्जों में जंग लगने के आरोपों पर मंत्रालय ने अध्ययन का हवाला दिया। ये अध्ययन एआरएआई, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के सहयोग से हुए थे। अध्ययनों में धातु और प्लास्टिक घटकों की संचालन क्षमता या अनुकूलता से संबंधित कोई समस्या नहीं मिली। हालांकि, पुराने वाहनों में कुछ रबर के पुर्जों को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है। मंत्रालय ने यह दावा भी खारिज किया कि ई20 ईंधन के उपयोग से वाहनों की वारंटी या बीमा कवरेज रद्द हो सकती है। ऑटोमोबाइल निर्माताओं और बीमाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि ई20 के लिए डिजाइन किए गए या अनुमोदित वाहन वारंटी और बीमा की शर्तों के तहत कवर होते हैं।
पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर सरकार ने कहा कि इथेनॉल संयंत्रों को वैधानिक पर्यावरणीय मंजूरी चाहिए। उन्हें भूजल नियमों का पालन करना होता है और शून्य तरल निर्वहन प्रणाली संचालित करनी पड़ती है। इस कार्यक्रम ने 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में योगदान दिया है और किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान में तेजी लाई है। कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को लगभग 930 लाख मीट्रिक टन कम किया है और 2014-15 से कच्चे तेल के आयात में 310 लाख मीट्रिक टन से अधिक की कमी आई है।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/government-rejects-misinformation-on-e20-ethanol-blending-program-2026-07-03