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ऐसी स्थिति में कानूनी उत्तराधिकारियों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए मृतक का मृत्यु प्रमाणपत्र, बैंक का निर्धारित दावा फॉर्म, दावेदार का आईडी व एड्रेस प्रूफ, और पैन या अन्य प्रासंगिक केवाईसी दस्तावेज जमा करने होते हैं।
इसके अलावा, यदि एक से अधिक कानूनी उत्तराधिकारी हैं और कोई वसीयत नहीं है, तो एफडी की राशि उन सभी में संबंधित उत्तराधिकार कानून के हिसाब से बांटी जाएगी।
अदालत से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र लेने की यह प्रक्रिया न सिर्फ हफ्तों से महीनों का समय खा जाती है, बल्कि इसमें जेब भी अच्छी-खासी ढीली होती है। कोर्ट फीस अलग-अलग राज्यों के हिसाब से संपत्ति के मूल्य के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में वसूली जाती है।
इसमें वकीलों का भारी खर्च, नोटरी और हलफनामे का कानूनी तामझाम मुफ्त में जुड़ जाता है। यदि उत्तराधिकारियों के बीच कोई आपसी विवाद हो जाए, तो यह समयसीमा और लंबी खिंच जाती है।
Source: https://www.amarujala.com/business/bonus/what-happens-if-there-is-no-nominee-for-bank-fd-matter-could-reach-court-and-funds-remain-stuck-for-months-2026-06-22