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अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ था। उनके माता-पिता यूक्रेन और भारत से जाकर अमेरिका में बसे थे। मेनन आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ हैं और अमेरिकी अंतरिक्ष बल में कर्नल के पद पर हैं।
अमेरिकी वायुसेना में काम करने के दौरान उन्होंने अफगानिस्तान में ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम के दौरान अग्रिम मोर्चे पर सेवा दी थी।
उन्होंने हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहियों का इलाज किया।
49 वर्षीय मेनन ने भारत में भी एक साल बिताया है। वह रोटरी एंबेसडोरियल स्कॉलर के रूप में भारत आए थे, जहां उन्होंने पोलियो टीकाकरण अभियान का अध्ययन और समर्थन किया।
आईएसएस पर मेनन लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे। वह यह भी जांच करेंगे कि कम गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों के रक्त प्रवाह, नसों की संरचना और रक्त की बनावट पर क्या असर पड़ता है।
वह अंतरिक्ष स्टेशन के पीने वाले पानी से नसों में चढ़ाने वाले तरल पदार्थ बनाने की तकनीक का परीक्षण करने में भी मदद करेंगे। भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों में यह तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है, जहां चिकित्सा सामग्री सीमित होगी।
मेनन अंतरिक्ष में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल बनाने की तकनीक को बेहतर बनाने पर भी शोध करेंगे। इससे भविष्य में उच्च क्षमता वाले कंप्यूटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बेहतर चिकित्सा उपकरणों के लिए जरूरी हिस्सों का बड़े पैमाने पर निर्माण संभव हो सकता है।
वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत तकनीक की मदद से अल्ट्रासाउंड जांच भी करेंगे। इससे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में धरती से चिकित्सा सहायता की जरूरत कम हो सकती है।
Source: https://www.amarujala.com/world/nasa-astronaut-anil-menon-set-to-travel-to-international-space-station-on-tuesday-2026-07-13