बैठक में काफ़ी नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला. गृह मंत्रालय और क़ानून तथा विधायी मामलों के मंत्रालयों के अधिकारियों ने समिति को ब्रीफ़ किया. इसके बाद कई मुद्दों पर समिति की बैठक में चर्चा हुई. जब रिपोर्ट पारित करने की बात आई तो अचानक यह मांग उठी कि हर सिफारिश पर मतदान कराया जाए.
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