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दिल्ली की तिहाड़ जेल एक बार फिर अपने खाने को लेकर चर्चा में है। इस बार विवाद की वजह बने हैं अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक, जो राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक आतंकी साजिश मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने अदालत में याचिका देकर कहा है कि उन्हें जेल का खाना बिल्कुल सूट नहीं कर रहा है। उनका दावा है कि जेल का खाना इतना मसालेदार, तला-भुना और तेल वाला है कि वे पिछले 50 दिनों से ठीक से खाना नहीं खा पाए हैं। इसी कारण उनका वजन करीब 14 किलो तक कम हो गया है।
मैथ्यू एरॉन वैनडाइक ने अदालत से अनुमति मांगी है कि उन्हें जेल के अंदर अपना खाना खुद बनाने दिया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय जेल का नियमित खाना उनके लिए बहुत ज्यादा मसालेदार और तैलीय है, इसलिए वे उसे खा नहीं पा रहे हैं। उनकी याचिका के अनुसार वे पिछले कई हफ्तों से केवल सोया मिल्क और कुछ तरल चीजों के सहारे रह रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ा है, शरीर में कमजोरी आई है, नजर कमजोर हुई है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हुई है। उन्होंने अदालत से इंडक्शन स्टोव, बर्तन और कुछ रसोई के सामान की अनुमति मांगी है ताकि वे अपनी पसंद का साधारण खाना बना सकें। इसके साथ उन्होंने लाल मांस, चिकन, मछली, झींगा, दाल, चावल, पास्ता, नूडल्स, आलू, प्याज, बीन्स, ब्रेड, मक्खन, ऑलिव ऑयल, दूध, सोया मिल्क, सब्जियां और कुछ मसालों की भी अनुमति मांगी है। परिवार ने अदालत को बताया है कि इस पूरे खर्च का भुगतान वही करेगा। इस मामले में अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा है। एनआईए ने कहा है कि उसे इस याचिका पर अलग से जवाब दाखिल नहीं करना है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जबकि वैनडाइक की न्यायिक हिरासत 1 अगस्त तक बढ़ा दी गई है।
दिल्ली की जेल व्यवस्था तीन बड़े जेल परिसरों में बंटी हुई है। पहला तिहाड़ जेल परिसर है, जो दुनिया के सबसे बड़े जेल परिसरों में से एक है और इसमें 9 केंद्रीय जेलें हैं। दूसरा रोहिणी जेल परिसर और तीसरा मंडोली जेल परिसर है, जिसमें छह केंद्रीय जेलें हैं। इन तीनों परिसरों की कुल 16 जेलों की क्षमता 10,026 कैदियों की है, लेकिन फिलहाल इनमें करीब 19,500 कैदी बंद हैं। इसी भीड़ को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने मंडोली जेल परिसर का निर्माण किया, जिसमें छह नई केंद्रीय जेलें बनाई गईं। इसके अलावा नरेला और बापरोला में भी नई जेलें बनाने का प्रस्ताव है।
दिल्ली जेल मैनुअल के मुताबिक जो कैदी अपना भोजन स्वयं नहीं जुटाता, उसे जेल प्रशासन रोज तय मानकों के अनुसार भोजन उपलब्ध कराता है। सभी कैदियों को सामान्य रूप से दिन में तीन बार भोजन दिया जाता है। सुबह का भोजन
जरूरत पड़ने पर मेडिकल ऑफिसर सुबह और दोपहर के भोजन का समय बदल सकता है।
जेल में किस श्रेणी के कैदी को कितना भोजन मिलेगा, यह दिल्ली के इंस्पेक्टर जनरल तय करते हैं। इसके लिए दिल्ली प्रशासन की मंजूरी जरूरी होती है।
जरूरत पड़ने पर वे भोजन की मात्रा बदल सकते हैं।
किसी विशेष जेल के लिए अलग डाइट तय कर सकते हैं।
मौसम के हिसाब से विशेष डाइट लागू कर सकते हैं।
जेल मैनुअल में अलग-अलग श्रेणियां तय हैं:
जेल में शिशु के साथ रहने वाली महिला कैदी
हर श्रेणी के लिए अलग डाइट स्केल निर्धारित किया जाता है।
हां, अगर किसी कैदी की तबीयत खराब है या डॉक्टर को लगता है कि सामान्य भोजन उसके लिए ठीक नहीं है, तो मेडिकल ऑफिसर विशेष डाइट लिख सकता है। हालांकि यह बदलाव केवल स्वास्थ्य कारणों से किया जा सकता है। किसी कैदी को सजा देने के लिए भोजन कम या ज्यादा नहीं किया जा सकता।
दिल्ली जेल मैनुअल के अनुसार जेल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होता है कि,
सभी कैदियों को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन मिले।
हर समय साफ और पीने योग्य पानी उपलब्ध रहे।
भोजन खाने योग्य और स्वाद के लिहाज से स्वीकार्य हो।
खराब या सड़ा हुआ खाद्य पदार्थ कैदियों को न दिया जाए।
भोजन बांटने के लिए उचित व्यवस्था और साफ बर्तन उपलब्ध हों।
मेडिकल ऑफिसर की जिम्मेदारी होती है कि रोज भोजन की गुणवत्ता जांचे, अगर भोजन खराब मिले तो अपनी डायरी में दर्ज करे, सप्ताह में कम से कम एक बार भोजन का वजन करवाए, अचानक निरीक्षण भी करे। वहीं जेल अधीक्षक को सप्ताह में कम से कम तीन बार तैयार भोजन का निरीक्षण करना होता है।
दिल्ली जेल मैनुअल में खाना बनाने के लिए भी विस्तृत नियम दिए गए हैं। आटा गेहूं को पीसने से पहले अच्छी तरह साफ किया जाएगा। मिट्टी, खराब दाने और अन्य अशुद्धियां हटाई जाएंगी। आटे को महीन छलनी से छाना जाएगा। सब्जियां ताजी सब्जियों को प्राथमिकता दी जाएगी। खराब, सड़ी और रेशेदार हिस्से हटाए जाएंगे। गर्मी और बारिश के मौसम में पर्याप्त मात्रा में सब्जियां उपलब्ध कराई जाएंगी। प्याज, आलू और मूली जैसी सब्जियों को विशेष महत्व दिया गया है। जबकि बैंगन, कद्दू, खरबूजा जैसी कुछ सब्जियों में पोषण और एंटी-स्कर्वी गुण अपेक्षाकृत कम बताए गए हैं। दाल और सब्जी में तेल सरसों का तेल या वनस्पति पहले अच्छी तरह गर्म किया जाएगा। दाल में डालने से पहले उसमें तला हुआ प्याज मिलाया जाएगा। इसके बाद ही तेल दाल या सब्जी में डाला जाएगा। मसाले मसाले और नमक अधिकारियों की मौजूदगी में दाल और सब्जी में डाले जाएंगे। मसालों का मिश्रण एक साथ तैयार किया जाएगा ताकि स्वाद और गुणवत्ता बनी रहे। किन चीजों का कितना नुकसान मान्य है? सफाई के दौरान कुछ खाद्यान्नों में वजन कम होना स्वाभाविक माना गया है। मैनुअल में इसकी अधिकतम सीमा तय की गई है।
नमक निर्धारित मात्रा में मिलाया जाएगा।
रोटी का व्यास 16 से 20 सेंटीमीटर के बीच होना चाहिए।
सभी रोटियां लगभग एक जैसी मोटाई की होंगी।
रोटी को धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाया जाएगा ताकि बाहर न जले और अंदर कच्ची न रहे।
खाना बनाने वाले बर्तन हमेशा साफ रखे जाएंगे।
अगर बड़ी संख्या में कैदियों का वजन कम होने लगे या स्कर्वी, एनीमिया, पेचिश और अन्य बीमारियां बढ़ने लगें तो मेडिकल ऑफिसर कारणों की जांच करेगा।
जरूरत पड़ने पर दाल की जगह पशु-आधारित भोजन दिया जा सकता है।
प्याज और मूली जैसी सब्जियां बढ़ाई जा सकती हैं।
अधिकारी कैदियों से पूछेंगे कि खाने को लेकर कोई शिकायत तो नहीं है।
अगर भोजन एक जैसा होने के कारण लोग नहीं खा रहे हैं तो उसमें बदलाव किया जाएगा।
अगर कोई कैदी भोजन लेने से मना कर देता है और उसकी जान को खतरा हो जाता है, तो मेडिकल ऑफिसर जरूरत पड़ने पर आर्टिफिशियल फीडिंग का निर्णय ले सकता है। इसका उद्देश्य केवल कैदी का जीवन बचाना होता है।
अमेरिका के टेक्सास डिपार्टमेंट ऑफ क्रिमिनल जस्टिस की वित्त वर्ष 2026 की 'डाइट फॉर हेल्थ' भोजन सूची के अनुसार पहले दिन कैदियों को यह भोजन दिया जाता है: नाश्ता
दक्षिण कोरिया: यहां जेल में कैदियों को बीन्स वाला चावल, ताजी सब्जियों के कई साइड डिश (बंचान), बीफ और मूली का सूप तथा बटेर के अंडे दिए जाते हैं। जापान: यहां कैदियों के भोजन में आमतौर पर ग्रिल्ड मछली, चावल, सलाद, सब्जियां, सूप और चाय शामिल होती है। फ्रांस: फ्रांस की जेलों में कैदियों को चिकन, भाप में पके फ्रेंच फ्राइज, फल और रविवार को पेस्ट्री दी जाती है। न्यूजीलैंड: यहां नाश्ते में सीरियल, दूध, टोस्ट, मार्जरीन, जैम और चाय दी जाती है। दोपहर में सैंडविच और सलाद मिलता है, जबकि रात के खाने में बीफ, रोस्ट बीफ, चिकन सॉसेज या फिश फिलेट के साथ दो तरह की सब्जियां, आलू, ग्रेवी, ताजा फल और बारी-बारी से दूध या दही दिया जाता है। शाकाहारी और वीगन भोजन का विकल्प भी उपलब्ध है। जर्मनी: यहां जेलों में कैदियों को दोपहर में हैमबर्गर, चीजबर्गर या वेजी बर्गर और नाश्ते में चीज, हैम और बेकन वाला मैकटोस्ट दिया जाता है। रूस: रूस की जेलों में कैदियों को कम गुणवत्ता वाला दलिया और पशु व वनस्पति वसा से बना मक्खन का विकल्प दिया जाता है। उत्तर कोरिया: यहां कैदियों को पानी जैसा पतला चावल और बीन्स का दलिया व बेहद पतला सूप दिया जाता है।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/what-do-tihar-jail-inmates-eat-here-s-everything-you-need-to-know-about-the-daily-food-menu-2026-07-13