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तेल टैंकर एमटी स्काईलाइट के साथ घटना 1 मार्च, 2026 को ओमान के मुसन्दम प्रायद्वीप के पास हुई। यह घटना एमकेडी व्योम पर हुए हमले के आसपास ही घटी थी, लेकिन इसमें हताहतों की संख्या ज्यादा दर्ज हुई। जहाज पर कुल 20 सदस्य सवार थे, जिनमें 15 भारतीय और 5 ईरानी नागरिक शामिल थे।

हमले के तुरंत बाद ओमान के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर (एमएससी) ने प्रतिक्रिया दी और सभी जीवित बचे क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया। घायल सदस्यों को ओमान के अस्पतालों में भर्ती कराया गया और बाकी चालक दल को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जहाज ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन से जुड़े होने की वजह से अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में था।

हमले में एक कैप्टन आशीष कुमार, जहाज के कप्तान थे। उनका शव कैप्टन के केबिन से बरामद किया गया। वहीं, हमले के समय जहाज के अगले हिस्से में मौजूद एक अन्य क्रू सदस्य दिलीप सिंह की भी इस घटना में जान चली गई थी। हमले में 4 अन्य नाविक घायल हुए।

अमेरिकी स्वामित्व वाले तेल टैंकर एमटी सेफसी विष्णु पर 11 मार्च, 2026 को इराक के बसरा के पास फारस की खाड़ी में एक भीषण हमला हुआ।

यह घटना पश्चिम एशिया तनाव के बीच व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की श्रृंखला का हिस्सा थी। यह हमला इराक के बसरा में खोर अल जुबैर बंदरगाह के पास इराकी जलक्षेत्र में हुआ।

घटना के समय यह टैंकर एक अन्य माल्टा-ध्वज वाले जहाज जेफिरोस के साथ शिप-टू-शिप माल की लोडिंग कर रहा था।

हमले में जहाज के अतिरिक्त मुख्य अभियंता देवनंदन प्रसाद सिंह की मौत हो गई। वह मुंबई के रहने वाले थे।

जहाज पर कुल 16 भारतीय चालक दल के सदस्य शामिल थे।

15 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचाकर बसरा पहुंचा दिया गया।

13 मार्च 2026 को ओमान के सोहार शहर में हुए एक ईरानी ड्रोन हमले में दो भारतीय नागरिकों की मौत हो गई और 10 अन्य भारतीय घायल हुए।

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद ओमान की जमीन पर आम नागरिकों के मारे जाने की यह पहली घटना थी।

धमाके की चपेट में दो भारतीय प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। घटना में कुल 11 लोग घायल हुए, जिनमें से 10 नागरिक भारतीय थे।

पांच लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि अन्य पांच का अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ी।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में सोहार में जमीनी हमले के कारण हुई इन भारतीय मौतों की पुष्टि की।

सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर 18 मार्च, 2026 को हुए एक बड़े ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई।

अमेरिका-इस्राइल की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने के बाद सऊदी अरब की धरती पर किसी भारतीय के मारे जाने की यह पहली बड़ी घटना थी।

इस हमले में एक भारतीय नागरिक की जान गई। इस घटना के साथ ही उस दौरान पश्चिम एशिया संघर्ष में मारे गए कुल भारतीयों की संख्या सात तक पहुंच गई।

भारतीय दूतावास ने 20 मार्च को इस मौत की आधिकारिक पुष्टि की।

26 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबुधाबी पर हुए एक बड़े ईरानी मिसाइल हमले के दौरान एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई।

पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान यूएई की धरती पर किसी भारतीय नागरिक की मौत का यह पहला मामला रहा।

अबु धाबी मीडिया ऑफिस की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस घटना में दो लोगों की मौत हुई।

मरने वालों में एक भारतीय नागरिक और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल था। वहीं, तीन अन्य लोग घायल हुए। इनमें एक भारतीय, एक अमीराती और एक जॉर्डन का नागरिक शामिल था।

कुवैत पर हुए 29 मार्च 2026 को एक भीषण ईरानी ड्रोन और मिसाइल स्ट्राइक के दौरान एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई।

पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान कुवैत की धरती पर किसी भारतीय नागरिक के मारे जाने की यह पहली घटना थी।

हमले का शिकार हुए भारतीय नागरिक की पहचान संथानसेल्वम कृष्णन (37) के रूप में हुई, जो मूल रूप से तमिलनाडु के रामनाथपुरम के रहने वाले थे।

भारतीय दूतावास ने 30 मार्च को सोशल मीडिया पर इस घटना की पुष्टि करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया।

कुवैत एयरवेज की एक विशेष कार्गो उड़ान के जरिए मृतक संथानसेल्वम कृष्णन और अन्य घटनाओं में मारे गए लोगों के पार्थिव शरीरों को कोलंबो के रास्ते कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे लाया गया, जहां से उन्हें उनके गृहनगर भेजा गया।

कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर 3 जून को एक भीषण ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और यात्रियों-स्टाफ समेत 63 लोग घायल हुए।

हमले में जान गंवाने वाले एकमात्र व्यक्ति मंजूर अहमद (55) थे, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के उज्जैन के रहने वाले थे।

मंजूर पिछले 30 वर्षों से कुवैत में एक दर्जी के तौर पर काम कर रहे थे। वह अपने परिवार में एक शादी में शामिल होने के लिए मुंबई की फ्लाइट पकड़ने एयरपोर्ट पहुंचे थे और बोर्डिंग से कुछ घंटे पहले ही इस हमले का शिकार हो गए।

हमले में कई और लोगों को गंभीर चोटें आईं। कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया।

10 जून को ओमान की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हाल ही में एमटी सेट्टेबेलो नाम के तेल टैंकर पर अमेरिकी सेना की ओर से हमला किया गया।

इस युद्ध क्षेत्र में किसी पश्चिमी देश (अमेरिका) की सैन्य कार्रवाई द्वारा भारतीय नागरिकों के मारे जाने की यह पहली और बेहद गंभीर घटना थी।

एमटी सेट्टेबेलो पलाऊ के झंडे वाला एक वाणिज्यिक कच्चे तेल का टैंकर है। इसे यूएई की कंपनी आईओएस मरीन संचालित करती है।

जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। इस हमले में शुरुआत में कुछ नाविकों के लापता होने की खबर आई। बाद में सामने आया कि इसमें तीन भारतीयों की मौत हो गई।

हमले के बाद ओमान की रॉयल नेवी और भारतीय राजनयिक मिशनों ने तुरंत बड़ा बचाव अभियान चलाया और शेष 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया।

11 जून को केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने उनके शव बरामद होने और मौत की पुष्टि की।

बाद में मृतकों की पहचान जहाज के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश (44), इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया (38) और डेक कैडेट आदित्य शर्मा (23) के रूप में हुई।

इस मामले में भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी जेसन मीक्स को तलब किया और इस हमले के खिलाफ मजबूत राजनयिक विरोध (डीमार्च) दर्ज कराया।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और निर्दोष नागरिकों पर बल प्रयोग को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया और खाड़ी क्षेत्र में अपनी सभी समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर डाल दिया।

ईरान ने ओमान के तट के पास साइप्रस के झंडे वाले एक वाणिज्यिक कंटेनर जहाज- जीएफएस गैलेक्सी पर हमला किया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस हमले के कारण जहाज में आग लग गई और उसके इंजन रूम को भारी नुकसान पहुंचा।

इस जहाज पर 11 भारतीय नागरिक सवार थे। इनमें से 10 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन एक भारतीय नाविक लापता हो गया।

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए नागरिक नौवहन और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से रोकने को कहा।

दूसरी तरफ इस हमले के जवाब में अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ अपनी तीसरे दौर की स्ट्राइक शुरू की।

ईरानी मिसाइलों ने ओमान के क्षेत्रीय जल में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी नौवहन लेन से गुजर रहे यूएई के दो तेल टैंकरों मोम्बासा और अल बाहिया पर हमला किया।

इस मिसाइल हमले में मोम्बासा टैंकर पर सवार एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई।

हमले में कुल आठ अन्य लोग घायल हुए, जिनमें से चार की हालत गंभीर थी। इन घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल थे।

इन हमलों को लेकर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया कि इन सुपरटैंकरों ने उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया। अपने नेविगेशन सिस्टम बंद कर दिए थे और उनके मना करने के बावजूद माइन वाले रास्तों से गुजरने की कोशिश की थी, जिसके कारण उन्हें निष्क्रिय कर दिया गया।

Source: https://www.amarujala.com/world/us-iran-war-indians-attacked-in-west-asia-conflict-from-mt-settebello-kuwait-uae-oman-mombasa-ship-explained-2026-07-14