मुरैना के गिरवर सिंह तोमर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. 1999 में CRPF की नौकरी छूटने के बाद वे संत बन गए और 'गिरवर दास महाराज' के नाम से पहचाने जाने लगे. लेकिन उन्होंने इंसाफ की लड़ाई नहीं छोड़ी. करीब 26 साल बाद अदालत से न्याय मिला और अब वे फिर CRPF की वर्दी पहनकर बीजापुर में ड्यूटी कर रहे हैं.

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