मार्जिन ट्रेडिंग की राह में बड़े खतरे हैं: बाजार की तेजी का फायदा उठाने की ताक में हैं रिटेल निवेशक, उधार लेकर पैसा लगा रहे हैं इन्वेस्टर्स।

ब्रोकर आपको रुपये मुफ्त में नहीं देता। इस रकम पर आपसे 12 से 18% तक का वार्षिक ब्याज वसूलता है।

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मार्जिन कॉल का खतरा मान लीजिए आपने जो शेयर एक लाख रुपये में खरीदे थे, वह बाजार में गिरावट के कारण गिरकर 70,000 रुपये के रह गए। अब ब्रोकर का दिया हुआ 75,000 रुपये का लोन जोखिम में आ जाता है। ऐसे में ब्रोकर तुरंत आपको मैसेज या मेल भेजकर अतिरिक्त पैसे जमा करने को कहेगा। इसे ही मार्जिन कॉल कहते हैं।

मान लीजिए आपने जो शेयर एक लाख रुपये में खरीदे थे, वह बाजार में गिरावट के कारण गिरकर 70,000 रुपये के रह गए। अब ब्रोकर का दिया हुआ 75,000 रुपये का लोन जोखिम में आ जाता है। ऐसे में ब्रोकर तुरंत आपको मैसेज या मेल भेजकर अतिरिक्त पैसे जमा करने को कहेगा। इसे ही मार्जिन कॉल कहते हैं।

जबरन शेयर बिकना अगर आप निश्चित समय के भीतर अतिरिक्त मार्जिन या कैश जमा नहीं कर पाते, तो ब्रोकर को कानूनी अधिकार होता है कि वह आपके शेयर बिना आपकी अनुमति के घाटे में भी बेच दे, ताकि वह अपना 75,000 रुपये का लोन वसूल सके। इसमें आपका पूरा शुरुआती निवेश (25,000 रुपये) डूब सकता है।

अगर आप निश्चित समय के भीतर अतिरिक्त मार्जिन या कैश जमा नहीं कर पाते, तो ब्रोकर को कानूनी अधिकार होता है कि वह आपके शेयर बिना आपकी अनुमति के घाटे में भी बेच दे, ताकि वह अपना 75,000 रुपये का लोन वसूल सके। इसमें आपका पूरा शुरुआती निवेश (25,000 रुपये) डूब सकता है।

ब्याज का दोहरा झटका बाजार में शेयर का दाम चाहे 20 फीसदी गिर जाए, लेकिन ब्रोकर का ब्याज कभी कम नहीं होता। यानी एक तरफ आपको शेयर की कीमत घटने से पूंजी का नुकसान हो रहा होता है, और दूसरी तरफ ब्रोकर का ब्याज आपकी जेब खाली कर रहा होता है।

बाजार में शेयर का दाम चाहे 20 फीसदी गिर जाए, लेकिन ब्रोकर का ब्याज कभी कम नहीं होता। यानी एक तरफ आपको शेयर की कीमत घटने से पूंजी का नुकसान हो रहा होता है, और दूसरी तरफ ब्रोकर का ब्याज आपकी जेब खाली कर रहा होता है।

अनुभवी और प्रो-ट्रेडर्स: जो तकनीकी विश्लेषण समझते हैं और स्टॉप-लॉस का सख्त पालन करते हैं।

शॉर्ट-टर्म स्विंग ट्रेडर्स: जो केवल 2 से 5 दिनों के लिए किसी खास इवेंट या तेजी का फायदा उठाते हैं और तुरंत लाभ कमाकर निकल जाते हैं।

पर्याप्त लिक्विडिटी वाले लोग: जिनके पास बैंक खाते में इतना सरप्लस फंड हो कि बाजार गिरने पर वे तुरंत मार्जिन कॉल को पूरा कर सकें।

लॉन्ग-टर्म निवेशक दूर रहें: यदि आप 6 महीने, 1 साल या 3 साल के लिए निवेश कर रहे हैं, तो गलती से भी MTF का चुनाव न करें। 12 से 18% का सालाना ब्याज आपके सारे संभावित मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर देगा।

सख्त स्टॉप-लॉस लगाएं: ट्रेड में एंट्री लेते ही अपना अधिकतम नुकसान तय कर लें। अगर शेयर आपके तय स्तर से नीचे जाता है, तो तुरंत घाटा स्वीकार करके बाहर निकलें।

पूरी क्षमता का इस्तेमाल न करें: ब्रोकर आपको 10 लाख तक मार्जिन लिमिट दे रहा है, तो केवल 2-3 लाख रुपये का ही इस्तेमाल करें।

क्वालिटी और लार्ज-कैप शेयर: केवल निफ्टी-50 या मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही मार्जिन लें। स्मॉल-कैप या पेनी स्टॉक्स में MTF लेना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इनमें जब लोअर सर्किट लगता है, तो निकलने का मौका भी नहीं मिलता।

ब्याज दरों की तुलना करें: अलग-अलग ब्रोकर्स की MTF ब्याज दरों और शुल्कों में अंतर होता है।

Source: https://www.amarujala.com/business/bonus/major-risks-in-margin-trading-retail-investors-looking-to-capitalize-on-market-rallies-by-borrowing-to-invest-2026-08-03