कोर्ट ने साफ किया कि पब्लिक प्लेस और पब्लिक व्यू दोनों अलग बातें हैं. अगर कोई घटना किसी के प्राइवेट घर या जगह पर भी हो रही हो, लेकिन वहां तीसरे पक्ष के लोग या आम जनता मौजूद है जो उस गाली-गलौज को सुन या देख सकती है, तो कानूनन उसे 'पब्लिक व्यू' ही माना जाएगा.

Source: https://ndtv.in/india/kerala-high-court-define-public-view-in-sc-st-act-casteist-remarks-view-11700425#publisher=newsstand