क्या सरकार का विरोध करने पर किसी नागरिक को जिला बदर किया जा सकता है? बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस सवाल का स्पष्ट जवाब देते हुए महाराष्ट्र पुलिस का आदेश रद्द कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने 'हॉर्स ट्रेडिंग' और 'वॉशिंग मशीन' जैसी चर्चित टिप्पणियां भी कीं, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। आइए, विस्तार से पूरे मामल को समझते हैं...
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महाराष्ट्र की राजनीति पर बॉम्बे हाईकोर्ट की एक टिप्पणी ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि राज्य में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है और यदि किसी नेता पर एफआईआर दर्ज है तो वह वॉशिंग मशीन में जाकर अपने मामले बंद करा सकता है। हालांकि यह टिप्पणी हल्के अंदाज में की गई, लेकिन इसके साथ ही हाईकोर्ट ने साफ कहा कि किसी नागरिक को केवल सरकार के फैसलों का विरोध करने के कारण जिला बदर नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस आधार पर महाराष्ट्र पुलिस का आदेश रद्द कर दिया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति माधव जामदार ने महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे राज्य में "हॉर्स ट्रेडिंग" चल रही है। उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक लगातार दल बदल रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने याचिकाकर्ता से हल्के अंदाज में कहा कि यदि उनके खिलाफ एफआईआर हैं तो वह भी "साइड बदल लीजिए, वहां एक वॉशिंग मशीन है।" अदालत की इस टिप्पणी को सत्तारूढ़ दल पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि यह आदेश का हिस्सा नहीं बल्कि मौखिक टिप्पणी थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार की नीतियों का समर्थन या विरोध करने का पूरा अधिकार है। यदि कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से धरना, प्रदर्शन या मोर्चा निकालता है तो केवल इसी आधार पर उसके खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत जिला बदर जैसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन करती है। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस उपायुक्त (जोन-6) द्वारा 3 दिसंबर 2025 को जारी जिला बदर आदेश और 27 मार्च 2026 को कोंकण मंडल आयुक्त द्वारा दिए गए आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि सरकार के फैसलों का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जा सकता। इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ की गई कार्रवाई कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकती।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/bombay-high-court-on-horse-trading-why-did-the-court-say-if-you-have-firs-go-to-the-washing-machine-2026-07-03