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2022 में साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की संख्या 10.29 लाख थी।
2024 में यह बढ़कर 22.68 लाख पहुंच गई। यानी केवल दो वर्षों में साइबर घटनाओं की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई।
बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने पड़ते थे।
कई बार अदालत की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ती थी।
एफआईआर जरूरी नहीं और कोर्ट ऑर्डर जरूरी नहीं।
पुलिस शिकायत के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
इससे छोटे पीड़ितों को सबसे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है।
मान लीजिए कुल 80 हजार रुपये फ्रीज हुए हैं, लेकिन किसी एक खाते में 50 हजार रुपये से ज्यादा नहीं हैं।
ऐसे मामलों में भी, एफआईआर और कोर्ट के आदेश की आवश्यकता नहीं।
इसके बाद ही रिफंड प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले MRM पोर्टल पर जाएं और सिटिजेन लॉगिन बटन पर टैप करें।
लॉगिन करें: अपने उसी मोबाइल नंबर से लॉगिन करें जो NCRP पोर्टल (साइबर क्राइम शिकायत) पर रजिस्टर्ड है।
रिक्वेस्ट डालें: रेज रिफंड रिक्वेस्ट सेक्शन में जाएं और अपनी 14-अंकों वाली कंप्लेंट आईडी (जो आपको NCRP पोर्टल से मिली थी) दर्ज करें।
डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें: मांगे गए जरूरी डॉक्युमेंट्स जैसे- पैन कार्ड, बैंक अकाउंट की डिटेल्स और FIR की कॉपी (अगर आपकी कैटेगरी में लागू हो) अपलोड करें।
स्टेटस चेक करें: सबमिट करने के बाद पोर्टल एक ट्रैकिंग कोड जनरेट करेगा जो 'MR2026' से शुरू होगा। इस कोड की मदद से आप भविष्य में अपने रिफंड का लाइव स्टेटस आसानी से चेक कर सकते हैं।
चोरी या खोया हुआ मोबाइल ब्लॉक कर सकते हैं।
IMEI ((इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी) ट्रैक कर सकते हैं।
संदिग्ध कॉल और संदेशों की शिकायत कर सकते हैं।
बैंक और वित्तीय संस्थानों के आधिकारिक संपर्क सत्यापित कर सकते हैं।
अक्तूबर 2025 में पहली बार एक महीने में 50,000 से अधिक मोबाइल रिकवर हुए।
देशभर में कुल रिकवरी 7 लाख से अधिक पहुंच चुकी है।
औसतन हर मिनट एक से अधिक मोबाइल फोन बरामद किया जा रहा है।
9.42 लाख से अधिक संदिग्ध SIM कार्ड ब्लॉक किए।
2.63 लाख से अधिक IMEI नंबर ब्लॉक किए।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/lost-money-in-an-online-scam-here-s-how-the-new-mrm-system-works-2026-06-13