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कतर, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने भी दोनों पक्षों से शांति की अपील की और जहाजों को होर्मुज के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी।
आईएमओ के मुताबिक, मौजूदा समय में होर्मुज में करीब 6,000 नाविक फंसे हैं, जो भारी अनिश्चितता और तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।
होर्मुज से कम से कम चार तेल और गैस के टैंकर यू-टर्न ले चुके हैं। तीन टैंकर खाली थे और एलएनजी लोडिंग के लिए कतर जा रहे थे।
भारत के झंडे वाला टैंकर लीला वाडिनार, जो कुवैत से 20 लाख बैरल तेल लेकर आ रहा था, वह ओमान की खाड़ी से यू-टर्न लेकर लौट गया।
कुछ तेल टैंकर होर्मुज पार करने में सफल भी हुए हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात से तेल लेकर जा रहा एक बड़ा टैंकर शामिल है।
खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले की धमकी के जवाब में ईरानी संसदीय समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सीधे चुनौती देते हुए कहा, "आइए, हम आपका इंतजार कर रहे हैं और हम वादा करते हैं कि एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा वापस नहीं लौटेगा।"
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री अली अकबर वेलायती ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि क्षेत्र छोटे देशों के राजनीतिक जुए की जगह नहीं है और ईरान इस क्षेत्र को साफ करने के लिए ट्रिगर पर उंगली रखे हुए तैयार खड़ा है।
ईरान ने अमेरिकी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि धमकाने और जबरन वसूली का युग खत्म हो गया है...हम झुकने वाले नहीं हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यापार के लिए मुख्य रूप से अब भी खाड़ी देशों पर निर्भर है, हालांकि बीते कुछ महीनों में भारत ने अमेरिका और रूस से तेल-गैस की खरीद को तेजी से बढ़ाया है और एलपीजी की जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भरता को कम करने में अहम सफलता हासिल की है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार खाड़ी में फंसे कच्चे तेल और एलपीजी से लदे कम से कम नौ भारतीय टैंकरों के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान के साथ उच्च स्तरीय बातचीत कर रही है।
इन जहाजों पर सवार 198 भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए ईरान से संपर्क किया गया है। भारत अपने नाविकों की सुरक्षा को लेकर खास तौर पर चिंतित है, क्योंकि जून में हुए अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं।
भारत ने पहले ही इस तरह के संकटों की तैयारी करते हुए अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता हासिल की है और मौजूदा समय में भारत 40 से अधिक देशों से तेल खरीद रहा है। यह कूटनीतिक रणनीति आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत के लिए एक बड़े 'बफर' का काम करेगी।
Source: https://www.amarujala.com/world/us-iran-tension-hormuz-strait-crisis-west-asia-conflict-tankers-hit-kharg-island-india-preparation-explained-2026-07-09