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कर्ज की ब्याज दरें तय करने में अब बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और अन्य सभी विनियमित वित्तीय संस्थानों की मनमानी नहीं चलेगी। एक ही नियम से इन संस्थानों में अब कर्ज की ब्याज दरें तय होंगी। इसके लिए आरबीआई ने नियमों में एकरूपता और मानकीकरण लाने का प्रस्ताव पेश किया है।

सभी संस्थानों में ब्याज तय करने के नियम व गणना के दिन समान होने से कर्ज प्रक्रिया में छिपी शर्तें खत्म होंगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

उपभोक्ता ब्याज दरों की आसानी से तुलना कर सही संस्थान से कर्ज ले सकेंगे।

रेपो रेट में कटौती का सीधा फायदा ग्राहकों तक पहुंचेगा। री-सेट तिथियों के मानकीकरण से फ्लोटिंग रेट लोन की दरें समय पर घटेंगी।

एनबीएफसी की ओर से वसूले जाने वाले मनमाने ब्याज या जुर्माने की गुंजाइश खत्म होगी, जिससे ग्राहक अधिकारों को मजबूती मिलेगी।

22 साल बाद फिर से मिलेंगे नए शहरी सहकारी बैंक खोलने के लिए लाइसेंस शहरी इलाकों में करीब 22 साल के बाद फिर से नए सहकारी बैंक खुल सकेंगे। इसके लिए आरबीआई ने ऑन-टैप (किसी भी समय आवेदन की खुली व्यवस्था) आधार पर दोबारा नए लाइसेंस जारी करने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा, हितधारकों से मिले सुझावों की समीक्षा के बाद नए लाइसेंस जारी करने पर 2004 से लगी रोक हटाने का फैसला किया गया है। इस संबंध में मसौदा दिशानिर्देश जल्द जारी होंगे।

खुदरा महंगाई के अनुमान को 5.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है।

केंद्रीय बैंक ने अनुमानों में संशोधन कर बनाया संतुलन आरबीआई के चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाने और महंगाई का अनुमान घटाने के पीछे रणनीतिक वजह नीतिगत दरों को लंबे समय तक 5.25 फीसदी पर स्थिर रखना है। महंगाई अनुमान घटाने से भविष्य में दरें बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा, वहीं वृद्धि दर बढ़ाने से रेपो रेट घटाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे अर्थव्यवस्था में संतुलन बना रहेगा।

Source: https://www.amarujala.com/business/bonus/uniform-rule-for-interest-rates-banks-and-nbfcs-no-more-arbitrary-practices-rbi-preparations-for-transperency-2026-08-06