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भारतीय फुटबॉल के इतिहास में कुछ नाम केवल टूर्नामेंट नहीं, बल्कि विरासत बन जाते हैं। डूरंड कप भी ऐसी ही एक विरासत है, जिसने पिछले 138 वर्षों में केवल विजेताओं को नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल की पहचान और उसकी संस्कृति को भी आकार दिया है। 1888 में शिमला के अन्नाडेल मैदान में शुरू हुआ यह टूर्नामेंट आज एशिया का सबसे पुराना और दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल

पहचान: एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट।

वर्तमान संरक्षक: भारतीय सेना की पूर्वी कमान।

वर्तमान स्वरूप: बहु-राज्य और बहु-शहर प्रतियोगिता।

1925: मोहन बागान बना डूरंड कप में खेलने वाला पहला भारतीय नागरिक क्लब।

1940: मोहम्मडन स्पोर्टिंग बना खिताब जीतने वाला पहला भारतीय क्लब।

फाइनल में रॉयल वारविकशायर रेजीमेंट को 2-1 से हराया गया।

मुकाबला देखने पहुंचे थे करीब एक लाख दर्शक।

डूरंड कप जीतकर फुटबॉल चैंपियन बनने वाली टीम को ये तीनों ट्रॉफियां प्रदान की जाती हैं, जो विश्व फुटबॉल में एक अनूठी परंपरा मानी जाती है। इतिहास के जीवंत गवाह डूरंड कप ने अपने सफर में कई अहम पड़ाव देखे हैं—

2019 से कोलकाता डूरंड कप का प्रमुख केंद्र बना।

पूर्वी कमान के संरक्षण में टूर्नामेंट का नया विस्तार हुआ।

पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कई शहर अब इसकी मेजबानी करते हैं।

भारतीय क्लबों के साथ सेना और सेवा टीमें भी लगातार हिस्सा लेती हैं।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/durand-cup-story-oldest-asian-football-tournament-1888-beginning-in-shimla-know-138-yr-indian-football-legacy-2026-07-18