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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई को फैसला सुनाते हुए कहा था कि विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर है।

कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें मुस्लिम समुदाय को इस स्थान पर शुक्रवार की नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।

हाईकोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को यह छूट दी थी कि वह राज्य सरकार से जिले में मस्जिद बनाने के लिए अलग जमीन आवंटित करने की मांग कर सकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन का फैसला केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कर सकते हैं।

हाईकोर्ट ने कहा था कि भोजशाला परिसर प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत 11वीं सदी का संरक्षित स्मारक है।

कोर्ट ने कहा था कि विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप भोजशाला का है।

कोर्ट ने कहा कि यह देवी वाग्देवी सरस्वती से जुड़ा मंदिर है, जिसका संबंध परमार शासक राजा भोज से माना जाता है। राजा भोज को धार को संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने का श्रेय दिया जाता है।

साल 2022 में एक हिंदू संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

संगठन ने भोजशाला के धार्मिक स्वरूप का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की थी।

11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने एक एकड़ क्षेत्र में 22 मार्च से 30 जून तक सर्वे कराने का आदेश दिया था।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/bhojshala-complex-dispute-sc-to-hear-appeals-against-madhya-pradesh-hc-verdict-2026-07-13